Tuesday, June 17, 2008

लखटकिया कार ' नेनो '

लखटकिया एक कार ने किया वार पर वार
सहन नहीं कार पाई उनको अपनी हीं सरकार
अपनी हीं सरकार सुनाया एक नया फरमान
लेना नेनो को तभी जब कर पाओ सम्मान
कहाँ उठाएं- कहाँ बिठाएँ- कहाँ चलायें सोचो
छोटा घर जो पास तुम्हारे पहले उसको बेचो
दिल्ली में रहना जो तुमको दिलको जरा बढाओ
घर के आगे सड़क घेर कर पार्किंग एक बनाओ
फ़िर तुम चाहे एक खरीदो या फ़िर लाओ सारे
वार झेल पाएंगे हम भी सुन लो जनता प्यारे
दिल्ली का दिल बहुत बड़ा है पहले कोष भरेंगे
चलने वाले चलें बाला से या फ़िर कहीं मरेंगे
लाख टकिया की लाख कहानी आज यहीं पर छुट्टी
वरना सुनने वाले हीं अब कर जायेंगे छुट्टी

Monday, June 16, 2008

क्षणिकाएँ

१ रोती है जब आत्मा , हँसते हैं कुछ लोग
व्यथित ह्रदय परमात्मा रचता है दुर्योग

२ जैसे को तैसा मिले कहते हैं समझाय
पानी है पत्थर कहीं , कहीं हवा बन जाय

३ योग किया कुछ जतन किया , हुआ बहुत जगराता
मन में हीं बेचैन जब करे भी क्या अब माता

सत्य

सत्य सनातन धर्मं है सत्य बडा हथियार
सत्य साथ दे आपका कभी पड़ो मंझधार
कभी पड़ो मंझधार स्वतः साथी बन कर आए
अन्धकार में दीपक बनकर सच्ची राह दिखाए
भर दे जीवन को खुशियों से मान दिलाये हरदम
बिगड़े काम बना दे देखो जैसे कोई हमदम
पल भर में जो पतन करा दे उसका नाम असत्य
इसी लिए कहता हूँ प्यारे हरदम बोलो सत्य

संसद से सड़क तक

संसद से अब सड़क तक एक किस्म के लोग
नियति की यह करवट कैसी या ऐसा संयोग
या ऐसा संयोग महज है खेल कोई कुदरत का
धक्का मुक्की गाली देना फितरत जैसे सबका
घोटाला बेईमानी अब तो इनकी शान निराली
शोर मचाते ऐसे जैसे ऊपर मंजील खाली
कौन इन्हें समझाए यह सब बेमतलब का अनहद
सड़क सही हो जाए तब हीं सुधर सकेगा संसद
टेंशन
घर में बैठो तो है टेंशन
बाहर निकलो तो है टेंशन
टेंशन टेंशन कितना टेंशन
जहाँ भी देखो वहाँ है टेंशन
बच्चों में एक्जाम का टेंशन
किसी को है परिणाम का टेंशन
अनजानों की कुछ न पूछो
किसी को हैमेहमान का टेंशन
आय अगर नहीं टेंशन
ज्यादा व्यय हो तो भी टेंशन
दुनिया की दस्तूर नई अब
सबको है पेंशन का टेंशन
प्रगति में बिछुदन का टेंशन
पास रहो अन बन का टेंशन
घर में है बाहर का टेंशन
बाहर में बस घर का टेंशन
सच बोलो तो उसका टेंशन
झूठे को वैसे ही टेंशन
काम करो तो उसका टेंशन
किसी को है आराम का टेंशन
ख़बर न आए तो है टेंशन
मिले ख़बर तो उसका टेंशन
टेंशन से बढ़ता है टेंशन
कैसे दूर करें अब टेंशन
टेंशन को टेंशन से मारो
अपने मन को स्वयं सुधारों
हार नहीं मानो तुम एक पल
होने लगी हमें भी टेंशन