Monday, June 16, 2008

क्षणिकाएँ

१ रोती है जब आत्मा , हँसते हैं कुछ लोग
व्यथित ह्रदय परमात्मा रचता है दुर्योग

२ जैसे को तैसा मिले कहते हैं समझाय
पानी है पत्थर कहीं , कहीं हवा बन जाय

३ योग किया कुछ जतन किया , हुआ बहुत जगराता
मन में हीं बेचैन जब करे भी क्या अब माता